शिकायत प्रक्रिया के बारे में और अधिक

आईस्टूडेन्ट कम्पलेन्ट्स आपकी शिकायत को सामयिक, किफ़ायती (कोस्ट-इफेक्टिव) और निष्पक्ष तरीके से और, विशेषकर निम्नलिखित तरीके से संबोधित करती है

  • एक पारस्परिक रूप से सहमत समाधान की ओर काम करने के लिए पार्टियों को प्रोत्साहित करती है
  • मतभेद को सुलझाने के लिए आम सहमति वाले साधनों का अधिक से अधिक प्रयोग करती है,  जैसे कि अधिनिर्णय से पहले मध्यस्थता और बातचीत का प्रयोग, अन्यथा मतभेद को सुलझाने के लिए बातचीत और मध्यस्थता उपयुक्त नहीं है।
  • मतभेद को सुलझाने के उपाय पर निर्णय लेने से पहले पार्टियों के विचारों को ध्यान मे लेती है
  • प्राकृतिक न्याय (नैचुरल जस्टिस) के सिद्धांतों के साथ संगत है
  • बिना - पूर्वाग्रह पर आधारित है

न्यूजीलैंड अंतर्राष्ट्रीय छात्र को चाहिए कि वे पहले प्रदाता के साथ इस मुद्दे को उठाएं और उन्हें उसे हल करने का एक अवसर दें। छात्र और प्रदाता जब एक बार प्रदाता की शिकायत प्रक्रिया के अंत तक पहुँच जाते हैं और छात्र परिणाम से खुश नहीं है, तो आईस्टूडेन्ट कम्प्लेन्ट्स  द्वारा मदद की जा सकती है।

शिकायत दर्ज करने से पहले, छात्र को यह जाँच कर लेनी चाहिए कि आईस्टूडेन्ट कम्प्लेन्ट्स  द्वारा वाकई में कुछ मदद की जा सकती है। यदि अनिश्चित हों तो, सलाह के लिए पहले NZQA से संपर्क करें।

अगर उनकी शिकायत एक संविदात्मक या वित्तीय समस्या या फिर दोनों है, तो वे फोन, ईमेल, पोस्ट द्वारा, या हमारे ऑनलाइन फार्म के माध्यम से आईस्टूडेन्ट कम्प्लेन्ट्स के पास शिकायत कर सकते हैं। एक बार हमारे पास शिकायत के आ जाने पर, हम लिखित रूप में उसकी रसीद 10 कार्यकारी दिनों के अंदर ईमेल या डाक द्वारा उसके प्राप्त होने की सूचना भेजेंगे। यदि शिकायत एक संविदात्मक या वित्तीय समस्या नहीं है, तो हम उसे सीधा NZQA के पास फॉलो-अप के लिए भेज देंगे।

जाँच-पड़ताल (इनवेस्टिगेशन)

आईस्टूडेन्ट कम्पलेन्ट्स  निम्नलिखित करेगी:

बातचीत (नेगोशियेशन)

उसके बाद हम छात्र और प्रदाता की एक ऐसे समझौते पर पहुँचने में मदद करेंगे जिससे वे दोनों सहमत हों। कुछ मामलों में, अगर हमें लगता है कि बातचीत या मध्यस्थता उपयुक्त नहीं होगी तो हम यह तय कर सकते हैं कि शिकायत को सीधा अधिनिर्णय (ऐंकर) के लिए भेज सकते हैं।

मध्यस्थता (मीडियेशन)

अगर इस प्रारंभिक चरण में पार्टियां समझौते पर नहीं आ सकती, तो हम पार्टियों के साथ मध्यस्थता की व्यवस्था करेंगे। कुछ मामलों में, अगर हमें लगता है कि मध्यस्थता उपयुक्त नहीं होगी तो हम यह तय कर सकते हैं कि शिकायत को सीधा अधिनिर्णय (ऐंकर) के लिए जाना चाहिए।

अधिनिर्णय (ऐडज्यूडिकेशन)  

अगर उसके बाद भी मध्यस्थता से समझौते पर नहीं पहुँचा जा सकता, तो मामले को एक अधिनिर्णायक के पास भेजा जाएगा जो एक बाध्यकारी निर्णय जारी करेगा।